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एवरीथिंग इज प्री-रिटन’ इन लाईफ़ (जिन्दगी मे सब कुछ पह्ले से ही तय होता है)।
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Wednesday, November 3, 2010

0 मंत्री अथवा गुरू किसे बनायें ?

मंत्री अथवा गुरू किसे बनायें, जिसमें सत्‍य को सत्‍य एवं असत्‍य को असत्‍य कहने का साहस होजो चाटुकारिता में नहीं बल्कि राज्‍यहित में विश्‍वास रखता होजो मान अपमान से परे हो, जिसे धन का लोभ न होजो कंचन व कामिनी से अप्रभावित रहे उसी व्‍यक्ति को राजा को अपना मंत्री अथवा गुरू नियुक्‍त करना चाहिये - चाणक्‍य नीति
शायद मेरे गुरुजी ऎसे नही थे, इसलिय मुझे बीस साल बाद  उनसे मोहभँग हो गया!

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