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Monday, October 18, 2010

1 बिल्ली का रास्ता काटना अपशकुन क्यों?

प्राचीनकाल से ही कुछ शकुन व अपशकुन की मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा ही एक अपशकुन है बिल्ली का रास्ता काटना। जिसे हमारे बड़े-बुजुर्गो ने एक बहुत बड़ा अपशकुन माना है, लेकिन आजकल अधिकांश लोग इसे एक अंधविश्ववास मानते हैं।
 
हमारी कोई भी प्राचीन मान्यता बिना सोचे समझे नहीं बनाई गई है। हमारे देश की हर एक छोटी से छोटी मान्यता के पीछे कोई ना कोई तथ्य अवश्य छिपा हुआ है। 

बिल्लियों को डायन का प्रतिरूप माना जाता है। यदि किसी के घर में बिल्लियां आपस में लड़ रही हैं तो माना जाता है कि शीघ्र ही घर में कलह उत्पन्न होने वाला है। बिल्लियों का रोना घर में किसी के मरने की पूर्व सूचना देता है। 

दरअसल इसमें बिल्ली का कोई दोष नहीं है बिल्ली अशुभ नहीं है। बिल्ली के पास ऐसी क्षमता होती है कि उसे किसी भी अशुभ घटना का पहले ही आभास हो जाता है और वह इससे बचने के लिए किसी को भी पूर्व सूचित कर देती हैं।

इसलिए हमारे बड़े-बूढ़े कहते हैं कि अगर बिल्ली ने रास्ता काट दिया है तो किसी भी काम जिसके लिए आप जा रहे हैं, उसे कुछ देर के लिए ही सही लेकिन टाल देना चाहिए। हो सकता है इससे आपके साथ होने वाली कोई बड़ी अनहोनी टल जाए।
Source: धर्म डेस्क. उज्जैन

Sunday, August 22, 2010

0 कैसे लोगों के पास नहीं ठहरतीं देवी लक्ष्मी?

तार्किक होना या बुद्धिमान होना कोई बुरी बात नहीं है। इंसान को वही बात स्वीकारनी चाहिए, जो तर्क की कसौटी पर खरी उतरे या जिसे बुद्धि स्वीकार करे। किंतु तर्क और बुद्धि की भी अपनी सीमा होती है। देवी-देवताओं के विषय में भी लोगों की ऐसी ही दुविधा है। गणेश की सवारी चूहा हो या लक्ष्मी का वाहन उल्लू, इसपर सहसा कोई विश्वास नहीं करता। यहां तक कि देवी-देवताओं के अस्तित्व पर भी शंका-संदेह किया जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि देवी-देवताओं के जो चित्र बनाए गए हैं वे प्रतीकात्मक हैं, जो कि उनके गुणों को व्यक्त करने का जरिया या संकेत होते हैं।
उल्लू पर सवार लक्ष्मी-लक्ष्मी का वाहन उल्लू माना जाता है जो कि रात यानि अंधेरे का निवासी है। अंधेरा सदैव असत्यता और अज्ञानता को जन्म देता है। यहां उल्लू मूर्ख इंसान का प्रतीक है। उल्लू पर सवार लक्ष्मी अत्यंत चंचल मानी गई है। चंचल यानि कि जो एक जगह स्थिह ना रहे। मतलब यह हुआ कि, उल्लू जैसे अज्ञानी व्यक्ति के पास यदि किसी तरह की किस्मत या संयोग से लक्ष्मी आ भी गई तो वह टिकेगी नहीं। वह जैसे अचानक आई है वैसे ही चली भी जाएगी।
विष्णु प्रिया लक्ष्मी-जबकि मेहनती, ईमानदार और सच्चा इंसान वो समझदारी प्राप्त कर लेता है, जिससे देवी लक्ष्मी उसको छोड़कर नहीं जाती। ज्ञानी के पास जो लक्ष्मी आती है वह उल्लू पर सवार होकर नहीं बल्कि भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर सवार होकर आती है। जहां सत्य और ज्ञान है वहां विष्णु है, जहां विष्णु हैं वहां उनकी चिरप्रिया लक्ष्मी स्थाई निवास करती है।

Thursday, August 12, 2010

0 ऊँ खास क्यों? जाने विज्ञान की प्रयोगशाला में..

र्म की जड़ें बहुत गहरी और मजबूत होती हैं। तभी तो मानव इतिहास के हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद धर्म की इमारत आज भी उसी बुलंदी के साथ तन कर खड़ी है। कुछ विद्वानों और विचारकों को डर था कि वैज्ञानिक प्रगति और आधुनिकता के साथ-साथ धर्म का प्रभाव और पहुंच घटने लगेगी, किन्त ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। भले ही इंसान चांद-तारों पर पहुंच गया हो पर अपनी जड़ों से कटकर ऊंचा उठना उसके लिये कभी भी संभव नहीं हो पाएगा।

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ऊँ' शब्द तीन अक्षरों अ, उ और म से मिलकर बना है। पर इसमें ऐसा क्या खास है कि इसे हिन्दुओं ने अपना पवित्र धार्मिक प्रतीक मान लिया है। ईसाइयों में क्रास का चिह्न तथा मुस्लिमों में 786 की तरह ही हिन्दुओं में स्वास्तिक और ऊँ का विशेष महत्व माना जाता है। असंख्य शब्दों और चिह्नों में से ऊँ और स्वास्तिक को ही क्यों चुना गया। आइये ऊँ की खासियत जाने विज्ञान की प्रयोगशाला में चलकर...

चिकित्साशास्त्री, शरीर विज्ञानी, ध्वनि विज्ञानी और अन्य भौतिक विज्ञानी ओम को लेकर आज बड़े आश्चर्यचकित हैं। इंसानी जिंदगी पर किसी शब्द का इतना अधिक प्रभाव सभी के आश्चर्य का विषय है। एक तरफ ध्वनिप्रदूषण बड़ी भारी समस्या बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी ध्वनि है जो हर तरह के प्रदूषण को दूर करती है। वो ध्वनि है ओम के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि। जरा देखें ओम के उच्चारण से क्या घटित और परिवर्तित होता है:-

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ओम की ध्वनि मानव शरीर के लिये प्रतिकूल डेसीबल की सभी ध्वनियों को वातावरण से निष्प्रभावी बना देती है।
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विभिन्न ग्रहों से आनेवाली अत्यंत घातक अल्ट्रावायलेट किरणें ओम उच्चारित वातारण में निष्प्रभावी हो जाती हैं।
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ओम का उच्चारण करने वाले के शरीर का विद्युत प्रवाह आदर्श स्तर पर पहुंच जाता है।
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इसके उच्चारण से इंसान को वाक्सिद्धि प्राप्त होती है।
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अनिद्रा के साथ ही सभी मानसिक रोगों का स्थाई निवारण हो जाता है।
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चित्त एवं मन शांत एवं नियंत्रित हो जाते हैं।
Source: धर्म डेस्क. उज्जैन