Fact of life!

एवरीथिंग इज प्री-रिटन’ इन लाईफ़ (जिन्दगी मे सब कुछ पह्ले से ही तय होता है)।
Everything is Pre-written in Life..
Change Text Size
+ + + + +

Monday, September 27, 2010

2 7 सबसे 'खराब' वैश्विक खेल आयोजन

दिल्ली कॉमनवैल्थ खेल भ्रष्टाचार की मिसाल के तौर पर देखे जा रहे हैं. परंतु ऐसा क्या पहली बार हो रहा है? नहीं. दुनिया के कई इस तरह के बड़े खेल आयोजन करने में विफल साबित हुए हैं, भारत अकेला नहीं है.

दिल्ली में हो रहे कॉमनवैल्थ खेल 2010 के लिए काफी कुछ लिखा जा चुका है और लिखा जा रहा है, परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि लगभग हर खबर नकारात्मक है. दिल्ली कॉमनवैल्थ खेल भ्रष्टाचार की मिसाल के तौर पर देखे जा रहे हैं और ऊपर से स्टेडियम और खेलगाँव को तैयार करने में देरी, बाल मजदूरी, गंदगी, सुरक्षा का अभाव जैसी बातों ने इस आयोजन की और भी बदनामी की है.

परंतु ऐसा क्या पहली बार हो रहा है?
 नहीं. दुनिया के कई इस तरह के बड़े खेल आयोजन करने में विफल साबित हुए हैं, भारत अकेला नहीं है
.

                                             म्यूनिख ओलम्पिक, 1972

भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया जाता है परंतु म्यूनिख ओलम्पिक खेलों के दौरान फलस्तिनी आतंकवादी बड़े आराम से खेलगाँव में घुस कर इजरायली खिलाडियों के निवास स्थल तक पहुँच गए थे और उन्हें बंदी बना लिया था. इसके बाद हुआ बचाव अभियान भी विफल रहा था और 11 इज़रायली खिलाड़ी मारे गए थे. 5 आतंकवादी भी मारे गए और 3 गिरफ्तार हो गए जिन्हें बाद में छोड़ देना पडा.

आयोजन की दृष्टि से भी म्यूनिख खेल विफल रहे थे और जर्मनी को शर्मसार होना पड़ा था.

       वानकुवर कॉमनवैल्थ खेल, 1952
जब खेल शुरू होने में कुछ दिन ही रह गए थे तब आयोजन समिति को लगा कि खेलों के आयोजन के लिए तो उनके पास पैसे ही नहीं बचे हैं. ब्रिटिश अम्पायर खेल समिति को कहना पड़ा कि वे खेलों के आयोजन के लिए किसी भी हद तक जाएंगे, चाहे भीख ही क्यों ना मांगनी पड़ी. विश्व मीडिया ने कनाडा की जमकर आलोचना की थी




    एडिनबर्ग कॉमनवैल्थ खेल, 1986
इस दौरान कॉमनवैल्थ खेलों के आयोजन के औचित्य पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगा था. स्टार धावक इन खेलों में भाग नहीं लेते थे. एडिनबर्ग कॉमनवैल्थ खेलों को इसका भारी खामियाजा भूगतना पड़ा था जब कोई स्टार स्वीमर खेलने नहीं आया क्योंकि कुछ सप्ताह बाद ही विश्व स्विमिंग स्पर्धा होनी थी. यह खेल आयोजन काफी खर्चीला और बिना लाभ का रहा.
                             जकार्ता एशियाड, 1962 
इंडोनिशिया के इज़रायल और ताईवान के साथ खराब रिश्तों के कारण इस खेल आयोजन पर गम्भीर पड़ा. इंडोनिशिया ने इन दोनों देशों को आमंत्रित करने से इंकार कर दिया. भारत ने इसका कड़ा विरोध किया और इंडोनिशिया को अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक संघ से ही निकाल दिया गया. आखिरकार इस समस्या का हल इन दोनों देशों के खिलाडियों को सादे आईडी कार्ड देकर निकाला गया. परंतु लोगों का प्रदर्शन और भारतीय उपनिवेश पर हमलों से यह खेल आयोजन काफी बदनाम हुआ.

                सिडनी ओलम्पिक, 2000 
सिडनी ओलम्पिक से ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद थी कि उसकी अर्थव्यवस्था सुधरेगी परंतु हुआ ऊल्टा. सिडनी ओलम्पिक पार्क जो खिलाडियों के रहने के लिए बनाया गया था आज खंडहर बन गया है. विकास के कई काम अधुरे ही रह गए और पर्यटकों की सुविधा का भी ध्यान नहीं रखा गया. कुल मिलाकर ये खेल बहुत खराब ढंग से आयोजित हुए और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक आज भी इसका बोझ विशेष कर चुकाकर उठाते हैं. 



  अटलांटा ओलम्पिक, 1996
लोग आज भी प्रश्न उठाते हैं कि आखिर ओलम्पिक जैसे खेलों का आयोजन करने के लिए अमेरीका ने अटलांटा शहर को ही क्यों आगे किया? अमेरीका ने अटलांटा शहर को ओलम्पिक लायक बनाने के लिए कोई खर्च नहीं किया. वहाँ की यातायात व्यवस्था लचर थी. और खेल शुरू होने के तुरंत बाद से अफरा तफरी मच गई जो अंत तक जारी रही. ना तो पर्यटक आए और ना ही अमेरीका को कोई आर्थिक लाभ ही हुआ.



          एथेंस ओलम्पिक, 2004
ये खेल भी आयोजन स्थलों के निर्माण में हुई व्यापक देरी की वजह से चर्चा में रहे. एक बार तो लगने लगा था कि ओलम्पिक खेल हो ही नहीं पाएंगे. परंतु बाद में ग्रीस सरकार ने आनन फानन में सारे निर्माण स्थल पूरे करवाए. जैसे तैसे खेल तो हो गए परंतु ग्रीस की आर्थिक हालत डाँवाडोल हो गई.




THANKS & COURTESY BY TARAKASH RESEARCH BUREAU

2 comments:

अपनी बहुमूल्य टिपण्णी देना न भूले- धन्यवाद!!