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Thursday, July 15, 2010

0 Air India and praful patel तुझे सलाम

कल समाचार पत्र में निचे लिखी खबर पढ़ी, पढ़कर बहुत ही ताज्जुब हुआ ! एक तरफ हम कहते है जब सारी दुनिया में मंदी थी, परन्तु हम पर उसका प्रभाव बहुत ही कम पड़ा, क्योंकि हमारा मैनेजमेंट  बहुत ही अच्छा था, हमारे प्रधान मंत्री एक सफल अर्थशाष्त्री है,

जहाँ एअर इंडिया करोडो के घाटे में चल रही है, सरकार  से उसे समय समय पर आक्सीजन मिलती है, कहीं दम न तोड़ दे. कम से कम इस पर देश का झंडा तो लगा है, मंत्री और अफसरों को और उनके परिवार को मुफ्त की हवाई यात्रा भी तो करनी है|

IPL के दोरान इसी सरकारी airlines को हमारे आदरनीय उड्डयन मंत्री की बेटी अपनी मर्जी से कहीं भी ले जा सकती है| क्योकि वह इसकी मालकिन जो है, पैसा हमारे टैक्स से आया है, तब भी क्या फर्क पड़ता है. आदरनीय प्रफुल पटेल जी आपको और आपके मैनेजमेंट को सलाम ! करो बरबाद इस देश को जी भर कर, जब ये देश ही नहीं रहेगा, तो आप और आप जैसे दुसरे नेता क्या करेंगे!!  

फ्लाइट्स जाती नहीं, पर दफ्तर चलता है
नई दिल्‍ली. भारत की सरकारी एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया की 'राजशाही' उसे भले ही ले डूब रही हो, पर 'महाराजा' अपनी आदतों से बाज नहीं आने वाले। आलम यह है कि एअर इंडिया तमाम ऐसी विदेशी लोकेशन्स पर अपना दफ्तर चला रही है, जहां एयरलाइंस के फ्लाइट्स की आवाजाही ही नहीं है।  एम्सटर्डम, लॉस एंजेल्स, मिलान, विएना, ज्यूरिख, मास्को, काहिरा, तेहरान, नैरोबी, सिडनी, चटगांव जैसी लोकशंस पर एयर इंडिया के दफ्तर हैं। ये दफ्तर चलाने में अच्‍छी-खासी रकम जाया हो रही है। पर कमाई एक धेला भी नहीं है, क्‍योंकि इन शहरों में एअर इंडिया की उड़ान सेवा ही नहीं है। कोपनहेगन, ब्रुसल्स और बेरूत में भी एअर इंडिया ने दफ्तर खोल रखे हैं। हालांकि इन तीन ऑफिसों के बारे में एअर इंडिया कह रही है कि इन्हें बंद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  एयर इंडिया की दलीलइस फिजूलखर्ची को जायज ठहराने के लिए एअर इंडिया के अपने तर्क हैं। कंपनी की दलील है कि लॉस एंजेल्स, विएना, ज्यूरिख और मास्को में एअर इंडिया का दूसरी एयलाइन्स के साथ कोड शेयरिंग एग्रीमेंट है, इसलिए वहां ऑफिस खोलना जरूरी है। यह तर्क मान भी लिया जाए, तो इन चार लोकेशन्स के अलावा दूसरी जगहों पर ऑफिस खोलकर रखना समझ से परे है। इन लोकेशन्स पर ऑफिस चलाने के लिए एअर इंडिया पानी की तरह पैसा बहा रही है। हमारे पास उपलब्‍ध साल 2008-09 के आंकडों के मुताबिक लॉस एंजेल्स में दफ्तर चलाने के नाम पर एयर इंडिया मैनेजमेंट ने एक साल में 15.76 करोड़ रुपए खर्च किए। इसी तरह नैरोबी ऑफिस के नाम पर 6.5 करोड़, ज्यूरिख के लिए 4.67 करोड़ और सिडनी ऑफिस के नाम पर 3.77 करोड़ रुपए खर्च किए गए। केवल इन्हीं लोकेशन्स को शामिल किया जाए तो साल भर का खर्च 30 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है।  एअर इंडिया में लगातार लागत खर्च घटाने की बात कहने वाले सिविल एविशन मंत्रालय ने कभी इन ऑफिसों को बंद करने की हिदायत दी या नहीं, इस पर एअर इंडिया कुछ भी कहने को तैयार नहीं। लेकिन इतना तो साफ है कि एअर इंडिया मैनेजमेंट की लापरवाहियों के चलते कभीं भारत की शान माने जाने वाले इस एयलाइन की हालत दिनों दिन बद्तर होती जा रही है। साल 2009-10 के दौरान एअर इंडिया को 5400 करोड़ा रुपए के घाटे का अनुमान जताया जा चुका है।


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